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माहवारी - पांच साल तक सबसे छुपाना

"मुझे माहवारी शुरू हुई जब मैं 13 साल की थी, लेकिन मैंने पांच साल तक इस बारे में अपनी परिवार में किसी को भी नहीं बताया," अनीता कहती है।

अनीता की माँ को उसकी माहवारी के बारे में उसकी शादी से कुछ दिन पहले ही पता चला। तब अनीता 18 साल की थी।  "मुझे नहीं लगता की उन्हें मेरी माहवारी में जानने की कोई ज़रूरत थी इसलिए मैंने उन्हें नहीं बताया, और जब उन्हें पता चलना तो चल ही गया," अनीता कहती हैं। 


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जैसा बाप, वैसा बेटा?

Kuber Sharmaजब मैं छोटा था, तब मेरी सबसे पसंदीदा किताब हुआ करती थी - 'मैं अपने पिता जैसा क्यूँ हूँ'

यह रूस के बच्चों की विज्ञानं श्रंखला किताबों में से एक थी, जिसमे अनुवांशिक विज्ञानं (जेनेटिक्स) को आसान तरीके से समझाया गया था। उसमे लिखी हुई बातों में मेरे ध्यान इतना नहीं था जितना उस किताब में बनी तस्वीरों में। हाँ, लेकिन मैं उस किताब के नाम से उलझ जाता था और उसके विषय से और भी ज़्यादा - लड़के बिलकुल अपने पिता जैसे होते हैं। क्यूंकि मैं बिलकुल अपने पिता जैसा नहीं था।

मुझे गलत मत समझिये. मैं अपने पिता से बहुत प्यार करता हूँ। उनसे ज़्यादा ईमानदार और दयावान इंसान मैंने आज तक नहीं देखा। लेकिन मैं उनकी तरह बिलकुल नहीं हूँ।

बहन पिता सामान

मैं उनके बगैर बड़ा हुआ। मेरे माता-पिता एक अच्छी खुशनुमा शादी में हैं लेकिन उनका पहला, दूसरा और तीसरा प्यार रहे हैं: साम्यवाद विचारधारा, साम्यवाद पार्टी और क्रांति। वो भी कोई ख़ास क्रम में नहीं।  क्रांति कभी आई नहीं, और वो आख़िरकार वापस अपनी पारिवारिक दुनिया में आ गए, भ्रम से बाहर लेकिन खुश; जब गोरबाशेव ने अपने शासन के टुकड़े कर दिए। ज़्यादा विस्तार में जाए बिना मैं यह बता दूँ की मैं बड़ा हुआ बहुत ही समर्पित माता-पिता के बीच। मेरी माँ अपने बाहर के काम और घर के काम काज में बहुत व्यस्त रहती थी। इसलिए मेरी बहन ने जगह ली मेरे पिता की। और मैं (जैसा की मेरी बीवी भी कहती है) उनका अँधा शिष्य था। उनकी तरह, मेरा भी सबसे पसंदीदा रंग था गुलाबी, मेरा भी लक्की नंबर था सात (मेरी बहन का जन्मदिन) और मैंने उनका हस्ताक्षर भी अपने हस्ताक्षर बना लिया था। (हम दोनों ही K . Sharma हैं) 

'जींस' या जींस?

तो यह सब हमारी जींस में होता है या फिर उस 'जींस' में जो हम अपने बड़े होने की उम्र में पहनते हैं? रिकोर्ड के लिए मैं आपको बता दूँ की मैं आज तक उसी ब्रांड की जींस पहनता हूँ जो मेरी बहन मेरे लिए बचपन में लायी थी। मैं स्कर्ट नहीं पहनता था और मेकअप नहीं लगाता था, लेकिन वाकई में मेरी पसंद 'रुढ़िवादी पौरुष'  से काफी अलग थी। गुलाबी कपड़ो को अगर अलग रख भी दें, तो मुझे खेल-कूद और गाड़ियाँ चलाने में भी कोई रुचि नहीं थी। 15 साल की उम्र तक मुझे यही लगता था की सेक्स का मतलब होता है दुसरे इंसान को नंगा देख लेना। मेरी बहन का प्रभाव होने का यह मतलब भी था की मैं महिलाओं की बहुत इज्ज़त करता था और बड़े होकर महिलाओं के अधिकार पर काम करना चाहता था।

समलैंगिक पुरुष

मैं सिर्फ लड़कों का लड़का नहीं था। और मुझे नहीं पता की अब भी मैं सिर्फ लड़कों का लड़का हूँ या नहीं। मुझे आज भी गाली गलोज बहुत खराब लगती है, जबकि मैं दिल्ली के अहम् पंजाबी इलाके में बड़ा हुआ हूँ। मेरा बात करने का तरीका, आदतें, आवाज़ और खड़े होने के तरीके को लेकर लोग मुझे समलैंगिक भी बुलाते हैं। जी हाँ, मेरी 'बैचलर पार्टी' इतनी मजेदार नहीं थी क्यूंकि मेरे बहुत सारे पुरुष दोस्त नहीं है। और महिलाएं मुझे बिस्तर में ले जाने के लिए बहुत शक्तिहीन समझती हैं।

अलग लेकिन खुश

मैं इन सब चीज़ का ज़िम्मेदार मैं दूंगा घर में किसी पुरुष के ना होने को, लेकिन मैं खुश जिस तरह से मैं बड़ा हुआ हूँ और जैसा मैं हूँ। और हाँ, मैं समलैंगिक नहीं हूँ, लेकिन होता तो बहुत गर्व से होता! मैं यह भी जानता था की मैं बाकि लड़कों से थोडा अलग था। लेकिन मैं इस बारे में बहुत खुश हूँ।   

मुझे लगता है की मैं अब अपने पिता से ज्यादा अलग नहीं हूँ। वो भी महिला अधिकारों के समर्थक थे और उनके खिलाफ शोषण के बिलकुल खिलाफ, और उनकी भी पुरुषों से ज्यादा महिला दोस्त थी। जी हाँ, मैं भी शायद बिलकुल अपने पिता जैसा निकलूं। और मुझे यह समजहने के लिए किसी रूसी किताब को पढने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

गुलाबी या नीला

जो जींस मुझे पिता से मिले और जो जींस मुझे मेरी बहन से मिली - दोनों का ही प्रभाव मुझ पर बहुत पड़ा है। मैं धन्यवाद दूंगा दोनों को क्यूंकि इसी वजह से मैं कुछ अलग हूँ। और मैं अक्सर सोचता हूँ की हम अपने लड़कों को पुरुष बनाना सिखाने की जगह उन्हें प्यार, इज्ज़त से पेश आना और बेवजह रुढ़िवादी राय बनाना क्यूँ नहीं सिखाते। क्या इस से फर्क पड़ना चाहिए की वो गुलाबी पसंद करते हैं या नीला? 

लेख: कुबेर शर्मा

फोटो: कुबेर शर्मा © Love Matters/RNW

इस लेख में व्यक्त किये गए विचार लव मैटर्स के भी हों, यह आवश्यक नहीं।

क्या पुरुष ज़्यादा बेहतर होते अगर वो 'पारम्परागत तरीके से मरदाना' न हों? यहाँ अपनी राय लिखिए या फेसबुक पर हो रही चर्चा में हिस्सा लीजिये। 

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आर एन डब्ल्यू - १० भाषाओँ में होलैंड से समाचार एवं विश्लेषण, दुनिया भर में २४ घंटे सातों दिन रेडियो, टेलीविजन और इन्टरनेट पर I