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माहवारी - पांच साल तक सबसे छुपाना

"मुझे माहवारी शुरू हुई जब मैं 13 साल की थी, लेकिन मैंने पांच साल तक इस बारे में अपनी परिवार में किसी को भी नहीं बताया," अनीता कहती है।

अनीता की माँ को उसकी माहवारी के बारे में उसकी शादी से कुछ दिन पहले ही पता चला। तब अनीता 18 साल की थी।  "मुझे नहीं लगता की उन्हें मेरी माहवारी में जानने की कोई ज़रूरत थी इसलिए मैंने उन्हें नहीं बताया, और जब उन्हें पता चलना तो चल ही गया," अनीता कहती हैं। 


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पुरुषों को क्या चाहिए?

Yamla Pagla Deewana'महिलाओं को क्या चाहिए' एक ऐसा सवाल है जिसने पुरुषों को सदियों से उलझा रखा है। 

लेकिन क्या मैं इस झूठ को गोद रहा हूँ अगर मैं यह कहूँ की असलियत मैं हम में से अधिकतर पुरुष इस बात की परवाह भी नहीं करते? हाँ, पुराने अच्छे सेक्स के अलावा। यह एक ऐसी चीज़ है जो हमें भी उतनी ही चाहिए जितनी की किसी आम महिला को।

और किसी बात पर विश्वास मत करिए। मेरा शोध तो यह दर्शाता है की अधिकतर महिलाएं उन मर्दों के बारे में सोचती हैं जो हर दस सेकंड में सेक्स के बारे में सोचते रहते हैं।

लेकिन आखिर हमें कितना सेक्स चाहिए? बात असल में यह है की सेक्स की क्रिया से ज़्यादा हमें उसकी उस से हुई तृप्ति में मज़ा आता है। जी हाँ, पुरुषों को ओर्गास्म/चरम आनंद बहुत अच्छा लगता है। यह मज़ेदार होते है और इसमें ज़्यादा मेहनत या इन्वेस्मन्ट नहीं करनी पड़ती।

सेक्स इतना ज़रूरी नहीं है, जितना की वीर्यपात। इसलिए तो हमें मुखमैथुन से बहुत प्यार है। ज़्यादा काम भी नहीं और संतुष्टि गारंटी के साथ। अगर भगवान है, तो लिंडा लवलेस को आशीर्वाद मिले।

पुरुषों को चाहिए

लेकिन स्तन और ओर्गास्म के अलावा हमें और भी चीज़ों में रुचि है जैसे कार, मशीने और स्पोर्ट्स।

तो आपका यमला पगला दीवाना पेश करता है पांच सर्वव्यापी 'पुरुष को चाहिए', जो की सारी लड़कियों को बताया जा सकता है। अचानक से यह लेख का वेबपेज अपने फ़ोन या कंप्यूटर पर अपनी बीवी/गर्ल फ्रेंड/साथी के लिए खुला छोड़ दीजिये। सिर्फ इसलिए ताकि उन्हें पता चले की आखिर हमें 'ठीक से' वो समझे कैसे।  

1. हम महिलाओं को उनके दोस्तों के हिसाब से परखते हैं। और यह भी आशा रखते हैं की वो हमारे दोस्तों को भी अपनाये। नहीं, हम यह नहीं चाहते की तुम हमारे दोस्तों के सबसे संजीदा दोस्त बन जाओ, लेकिन अगर तुम नहीं बनोगी, तो भी हम कुछ अनुमान तो लगायेंगे ही। अपने दोस्तों को दिखाना ऐसा है जैसे की अपने असली रंग दिखाना।

2. जी हाँ, हमारी सबसे अच्छी दोस्त महिला हो सकती है। लेकिन तुम्हारा सबसे अच्छा दोस्त पुरुष नहीं हो सकता। अगर उन्हें दुसरे पुरुषों में रुचि हो, तो भी नहीं। क्यूंकि कभी न कभी, हमने अपनी सबसे अच्छी दोस्त के साथ (चाहे कल्पना में ही सही) कुछ 'मज़ेदार' पल बिताये हैं। लेकिन हाँ, हमारे लिए तुम पर पूरी तरह विश्वास करना मुश्किल है।

3. अगर हम 'आई लव यु' सच में बोलते है, तो हम और किसी बात की परवाह नहीं करते। सेलयुलाइट कामुक है और तुम्हारे बाल हमेशा अच्छे लगते हैं। और हम जानते हैं की तुम्हारी बहेन/साथ काम करने वाली छोटी स्कर्ट वाली लड़की निषिद्ध है। लेकिन देखने में कुछ बुराई नहीं। सिर्फ थोड़ा ही। ज़रूरी अनुमान: हम हस्तमैथुन और पोर्न को धोकेबाज़ी नहीं समझते। अगर तुम समझती हो, तो समझाओ हमें।

4. हम में से अधिकतर पुरुष रोमांस को छोटे समय तक का झांसा समझते हैं। पेचीदा बात ये है की जब हम अपना प्यार व्यक्त करते हैं तो हम क्या इस रोमांस पर विश्वास करते हैं। नहीं तो तुम्हारे पास होता हैं पहले तीन महीने का लाड-प्यार और हमें मिलता है ज़िन्दगी भर का लाड -प्यार। वो अलग बात है की तुम होश में आ जाओ। या फिर हम और फ़िर सच में हमें प्यार हो जाये।

5. हम सेक्स को ना नहीं कहते। सिर्फ अपनी संतुष्टि के लिए ही नहीं बल्कि अपने खुद के राक्षस के लिए भी। हम अधिकतर उससे ज़्यादा अधिक असुरक्षित महसूस करते हैं जितना की तुम सोचते हो। हम अधिकतर अपने आपको ज़्यादा मरदाना साबित करने के दबाव में होते हैं। जो हमें सबसे ज़्यादा चाहिए वो है तुम्हारी मदद. हम हमेशा गाड़ी नहीं चलाना चाहते, बिल नहीं भरना चाहते, रास्ते याद अन्हीं रखना चाहते और आई.पी.एल. के स्कोर भी नहीं जानना चाहते। लेकिन हमसे उम्मीद रखी जाती है। 

और यही तो हमारे अस्तित्व की व्यथा है। यमला पगला दीवाना ट्रस्ट सहमति देता है की अधिकतर पुरुष अपनी मर्दानगी को लेकर उलझे हुए होते हैं, वो भी यह जानने के लिए की वो सबसे ज़्यादा क्या चाहते हैं। समाज, माताएं और दुसरे कुछ पुरुष कुछ थकाऊ रोल-मोडल हमारे सामने रख देते हैं। 

हमारी ज़्यादा आलोचना न करिए। हमें प्यार करिए और अच्छा इंसान बनाने में मदद करिए। सिर्फ यही तो चाहिए पुरुषों को। और हाँ, नियामत रूप से ओर्गास्म। लेकिन महिलाओं को यह तो पहले से पता ही है।

लेख: कुबेर शर्मा 

फोटो: कुबेर शर्मा, © Love Matters/RNW

इस लेख में व्यक्त किये गए विचार लव मैटर्स के भी हो, यह ज़रूरी नहीं है।

क्या आप कुबेर की बात से सहमत हैं? इधर अपनी राय बताइए या फेसबुक पर चर्चा में हिस्सा लीजिये।

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आर एन डब्ल्यू - १० भाषाओँ में होलैंड से समाचार एवं विश्लेषण, दुनिया भर में २४ घंटे सातों दिन रेडियो, टेलीविजन और इन्टरनेट पर I