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माहवारी - पांच साल तक सबसे छुपाना

"मुझे माहवारी शुरू हुई जब मैं 13 साल की थी, लेकिन मैंने पांच साल तक इस बारे में अपनी परिवार में किसी को भी नहीं बताया," अनीता कहती है।

अनीता की माँ को उसकी माहवारी के बारे में उसकी शादी से कुछ दिन पहले ही पता चला। तब अनीता 18 साल की थी।  "मुझे नहीं लगता की उन्हें मेरी माहवारी में जानने की कोई ज़रूरत थी इसलिए मैंने उन्हें नहीं बताया, और जब उन्हें पता चलना तो चल ही गया," अनीता कहती हैं। 


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कंडोम और फायदे

Yamla Paga Deewanaकंडोम - दोस्त है या मुसीबत! लेकिन सच में, कंडोम हमें यौन संचारित रोग और साथ में रिश्तों में आती समस्याओं से भी बचाता है।

लेकिन मैंने अभी कुछ दिनों पहले ही सुना की मुंबई में एक महाशय ने अपनी बीवी को तलाक देने का सोच लिया क्यूंकि उसको लगता था की उसकी बीवी को उससे ज़्यादा अपने रबड़ के दोस्त 'कंडोम' से प्यार था। इस गधे को इस से ज़्यादा अच्छा बहाना नहीं मिला था तलाक का? अधिकतर पुरुष जिन्हें मैं जानता हूँ, कंडोम के दीवाने हैं। या शायद नहीं।

मैंने भारत के मध्यम वर्गीय परिवार में जन्म लिया जहाँ लैंगिक व्यवहार को लेकर काफी उलझाने वाले ख्याल होते हैं। एड्स का मुद्दा तो खुल कर बाहर आ गया - धन्यवाद हो शबाना आज़मी का। लेकिन मुझे कोई एच.आई.वी. पोसिटिव व्यक्ति नहीं मिला जो छु कर यह ख़बर फैलाता। निराशा इस बात की थी की शबाना जी ने सुरक्षित सेक्स और सेक्स के मज़े को लेकर मिथ्याओं को नहीं उठाया।  लेकिन किसी को भी स्कूल की गपशप से इतना तो पता ही चल जता था की कंडोम ज़रूरी है।

कंडोम जोश

शायद यह सिफलिस बीमारी का डर था, या शायद कामसूत्र के विज्ञापन, लेकिन मेरे और मेरी उम्र के लड़कों के लिए, कंडोम कोई बढ़िया चीज़ ही थी। वो अलग-अलग स्वाद में तो उपलब्ध थे यकीन साइज़ सिर्फ एक, और इसलिए एक बढ़िया तुल्यकारक भी। 

और सबसे मज़ेदार चीज़ होता था इन्हें खरीदना। कम से कम शुरुवात में तो। वो उतेजना, डर और उत्सुकता जो कंडोम को मेडिकल की दुकान से खरीदते वक़्त होती थी वो अगर ज़्यादा नहीं तो कम से कम उतनी तो होती थी जितनी की 'पहली बार' करने में! मैं जोशपूर्ण, पवित्र और कुंवारेपन (वर्जिनटी) को ख़त्म करने वाला, सब कुछ एक ही समय पर महसूस करता था।

किशोरावस्था में इतना पागलपन था कंडोम को लेकर, की मुझे कंडोम टेस्टर के रूप में बहुत इज्ज़त भी मिली। वो बात अलग है की मुझे ये काम एक ऐसे ही ऑनलाइन प्रतियोगिता की वजह से मिली। वो काम कुछ 12 महीने रहा और फिर मुझे कुछ बिना इस्तेमाल किये सेम्पल वापस करने पडे। इस से यह भी साबित होता है की सिर्फ बढ़िया पद का नाम ही काफी नहीं होता लड़कियों पर प्रभाव डालने के लिए।

बिना जीन कसे घोड़े पर

ख़ैर, तब के बाद से मैं काफी प्रभाव्य महिलाओं से मिला हूँ।  लेकिन मैंने कंडोम के बगैर सेक्स के बारे में तब तक नहीं सोचा था जब तक मेरी एक गर्ल फ्रेंड ने मुझे ये नहीं बताया की उसने कभी कंडोम के साथ सेक्स नहीं किया था। उसने कहाँ की बिना जीन कसे घोड़े की तरह करना ही सबसे बढ़िया तरीका होता है। आगे क्या हुआ ये जानने के लिए कोई पुरस्कार नहीं मिलेगा। फिर, एक लड़की के साथ सम्बन्ध और आलस्य के चलते 'बिना कंडोम' एक आदत सी बन गयी। और फिर सामना तो करना ही पड़ेगा ना, कंडोम कुछ हद तक परेशानी भी तो बन जाते हैं। आखिर, हमारे वैज्ञानिकों ने अभी तक ऐसा कोई कंडोम नहीं बनाया है जो उस सारी उचल-कूद के दौरान विराम का काम करे।

रबड़ अनुसंधान

अपने लव मैटर्स के पाठकों को गहरी परख देने की लिए मैं प्रतिबद्ध हूँ, इसलिए मैंने खुद ही एक अनुसंधान किया। मैंने 6 पुरुष और 3 महिलाओं से बातचीत की सेक्स और कंडोम के लचीलेपन के बारे में।

स्पष्ट रूप से, मुख्या बाधा जो पुरुष महसूस करते हैं वो है 'पूरी उतेजना में कमी'। महिलाओं ने भी यही कारण दिए लेकिन लिंग के आकार को ज़्यादा दोष दिया, ना की कंडोम की बनावट को। महिलाएं डिल्डो पेड वाले कंडोम की मांग कर रही थी। जी हाँ, इसके पेटेंट के लिए मैं पहले ही अपनी फाइल लगा चूका हूँ।

अपने इस अनुसंधान को आगे बढ़ते हुए, मैंने तीन दिन की परीक्षा की कंडोम का आनंद के साथ माप करने के लिए। और मुझे यह बताते हुए बहुत ही ख़ुशी हो रही है की, कंडोम के साथ या उसके बिना, मैं ज़्यादा अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहा हूँ। 

मेरे एक शैख्बाज़ दोस्त ने एक अँधा टेस्ट किया (मुझसे न पूछिए कैसे)। उसने कहा की कंडोम के साथ या उसके बिना, उसे बराबर ही ओर्गास्म (चरम आनंद) होता है। शायद कंडोम से नफरत करने वालों की बारी है अब यह प्रशिक्षण करने की।

थप्पड़

मैं मानता हूँ की कंडोम सेक्स को थोड़ा जटिल बना देते हैं, लेकिन मैं यह तो जानता हूँ की किसी भी गर्भनिरोधक गोली से यह सस्ता है। आप राहुल गाँधी के अंकल से प्रेरित नसबंदी क्रोध से शायद बच जाये जब वो अंततः प्रधान मंत्री बन जाये। 

और क्या आपने अपने साथी को बोला है इसे, मतलब कंडोम को आपके लिए लगाने को। वो भी मुह से। जी हाँ, मुझे भी थप्पड़ ही पड़ा था।

मैं ये तो नहीं कह सकता की मैं हमेशा ही कंडोम का इस्तेमाल करूँगा। लेकिन, लम्बे समय की समझदारी को देखते हुए, और लम्बे रिश्ते को देखते हुए, मैं कंडोम का इस्तेमाल हर बार करूँगा। या फिर मुख मैथुन से ही काम चला लूँगा। या शायद हाथ से ही काम चला लूँ। लेकिन दोस्तों याद रखिये, चिकनाई वाले कंडोम का एक ख़ास इस्तेमाल, जिसके बारे में कम जानकरी हैं लोगों को वो है स्वयं-सुख।

लेख: कुबेर शर्मा

फोटो: कुबेर शर्मा, © Love Matters/RNW

इस लेख में व्यक्त किये गए विचार लव मैटर्स के भी हों, यह आवश्यक नहीं है।

कंडोम - इनसे प्यार करिए, इनके साथ रहिये या इनसे करिए नफरत? आप क्या सोचते हैं यहाँ अपने विचार लिखिए या फेसबुक पर हो रही चर्चा में भाग लीजिये।

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