यदि आप अपने शरीर की कमियों को लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं तो किसी ऐसे व्यक्ति से बात करके देखें जिस पर आप भरोसा करते हों। आप पाएँगे कि ये उलझन हर व्यक्ति को होती है। आगे पढ़ें।
माहवारी - पांच साल तक सबसे छुपाना
"मुझे माहवारी शुरू हुई जब मैं 13 साल की थी, लेकिन मैंने पांच साल तक इस बारे में अपनी परिवार में किसी को भी नहीं बताया," अनीता कहती है।
अनीता की माँ को उसकी माहवारी के बारे में उसकी शादी से कुछ दिन पहले ही पता चला। तब अनीता 18 साल की थी। "मुझे नहीं लगता की उन्हें मेरी माहवारी में जानने की कोई ज़रूरत थी इसलिए मैंने उन्हें नहीं बताया, और जब उन्हें पता चलना तो चल ही गया," अनीता कहती हैं।
कमेन्ट का उत्तर देंकमिट्मन्ट (वचनबद्धता): इसमें इतना डरावना क्या है?
आजकल हमें अपने साथी के साथ एक स्थायी रिश्ता में रहना इतना मुश्किल क्यूँ लगता है?
इतना मुश्किल तो नहीं है ऐसे युगल/ दम्पति ढूँढना जो की जवानी में प्यार कर बैठे, शादी भी करी, बच्चे भी और साथ-साथ बुढ़ापा भी गुज़ार रहे हैं। ऐसे लोगों की वजह से ही तो 60 साल की शादी में साथ रहना आसान लगता है। लेकिन अब तो समय भी बदल गया है और लोग भी।
जवान लोगों को अपने माता-पिता से भी ज़्यादा मुश्किल हो रही है अपने लिए स्थायी साथी ढूँढने में। और ज़्यादा से ज़्यादा लोग किसी तरह के उपचार की ओर रुख कर रहे है अपने रिश्ते की डूबती नाव को बचाने के लिए, ऐसा डॉक्टर क्लोडिया मेसिंग का कहना है जो की बूएनोस एरेस के ग्रैजूऐट स्कूल ऑफ़ काउंसेलिंग एंड फॅमिली थेरपी की संचालक है।
तो आखिर कारण क्या है? समाज में आ रहे बदलाव ओर लोगों की सोच में आ रहा बदलाव जो की सारी दुनिया में देखने को मिल रहा है, लेकिन हर संस्कृति इसका सामना अलग तरीके से कर रही है, ऐसा डॉक्टर मेसिंग का कहना है। मुख्य कारण यह है की लोगों को अपना व्यक्तित्व खोने का डर है - उन्हें लगता है की वो अपने साथी के साथ बंधने से एक जाल में फस जायेंगे - ओर कहीं न कहीं उन्हें यह भी डर है की कहीं उन्हें पूरा महसूस करने के लिए उनके साथी पर निर्भरता ना हो जाये।
व्यक्तित्व
काम और परिवार में ताल-मेल रखने में मुश्किल तो होती है, डॉक्टर मेसिंग कहती हैं। और जैसे-जैसे समय निकलता है, दम्पति अक्सर रिश्ते में बोर होने लगते हैं, और कई बार बंधे हुए भी महसूस करते हैं। उनकी अभिप्रेरणा गिरने लगती है और वो अपने जीवन में दुसरे लोगों को ढूँढने लगते है जिससे की वो कम बंधा हुआ महसूस करे।
आजकल के जवान लोग अपनी 'अकेले' वाली ज़िन्दगी को खोना नहीं चाहते, अगर वो अपने साथी के साथ रह रहे हो, तब भी, डॉक्टर मेसिंग कहती हैं। आजकल ये आम हो गया है की दम्पति/युगल साथ रहते हुए भी अपनी 'अकेले' की ज़िन्दगी को कायम रखते हैं और अपने अलग-अलग प्लैन भी बनाते हैं।
अलग-अलग ज़िन्दगी
यह इसलिए भी क्यूंकि संसार के बहुत सारे हिस्सों में, युगल/दम्पति प्रजातंत्रिक हो गए हैं। पुरुष और महिला की जो भूमिका थी वो भी बदल चुकी है। आज कल महिलाएं काम करती हैं और पैसे के लिए पुरुषों पर निर्भर नहीं हैं। हालाँकि, आज भी काम के साथ-साथ महिलाएं बच्चों के साथ ज़्यादा समय बिताती है और ज़िम्मेदारी उठाती है, पुरुष, पिता के रूप में बच्चों के पालन-पोषण में पहले से ज़्यादा ज़िम्मेदारी लेने लगे हैं।
लेकिन अगर कोई दम्पति/युगल बिलकुल अलग-अलग ज़िन्दगी बिताने लगे, तो परिवार में बच्चों पर काफी बुरा असर पड़ता है। माता - पिता को अपनी ज़िन्दगी से बच्चों को जुड़ने में बहुत मुश्किल होती है। हालाँकि भूमिकाएं बदल गयी हैं, पुरुषों का, पिता की हैसियत से प्रवर्ति ज़्यादा नहीं बदली है। वो अपनी पत्नी से फुल-टाइम माँ की ड्यूटी की अपेक्षा रखते है, ताकि वो अपने कामों में कोई परेशानी ना महसूस करें, ऐसा डॉक्टर का मानना है।
परिपक्वता और कोशिश
ऐसी व्यक्तिपरक पालने का तरीका आगे के लिए परेशानी बढ़ाने वाला काम कर रहा है, डॉक्टर का मानना है। अनजाने में भी, हम सब बिलकूल वैसा ही बर्ताव करते है जैसे की हमने अपने माता-पिता को करते देखा होता है। और जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते है, ये व्यक्तिपरक बच्चे भी बड़े होकर अपने साथी की तरफ भावनात्मक तौर पर स्थायी रूप से जुड़ने में मुश्किल का सामना करेंगे। और शायद उनके भी मन में वही डर हो, की अपने आपको अपने साथी के साथ बंधने से वो अपनी स्वंतंत्रता और व्यक्तित्व खो ना दें।
तो क्या इस व्यक्तिगत स्वतंत्रता और साथी की ओर वचनबद्धता के बीच का भी कोई रास्ता है? "हाँ क्यूँ नहीं, लेकिन इसके लिए दम्पति/युगल की तरफ से परिपक्वता और कोशिश की ज़रूरत है," ऐसा डॉक्टर मेस्सिंग का कहना है। "एक कोशिश जिसमे दोनों साथी साथ में आगे बढ़े और समय-समय पर अपने रिश्ते का मूल्यांकन करते रहे।"
अनमोल महसूस करें
तो आखिर राज़ क्या है एक ऐसा साथी पाने का जिसके साथ आप ख़ुशी से बंधना भी चाहे और उसके साथ बूढे भी होना चाहे?
"एक युगल तभी साथ में खुश रह सकते है जो की अपने आप से भी खुश हों," डॉक्टर मेस्सिंग का कहना है। "और अच्छा महसूस करने में भी कोशिश लगती है। लोगों को अच्छा लगता है जब उन्हें उनके किसी भी काम के लिए सराहा जाता है, जब उनके पास अच्छा जॉब होता है, ऐसा काम या कला जो उनको एक पहचान देती है।
"दूसरे शब्दों में, लोगों को उपयोगी महसूस होना अच्छा लगता है, अनमोल महसूस करना अच्छा लगता है। और फ़िर एक स्थायी साथी मिलना उस स्तिथि से तो आसान हो जाता है जब की आप अस्थिरता महसूस करते है और आपको पता ही नहीं होता की आप खुद क्या है और अपनी ज़िन्दगी से क्या चाहते हैं।"
फोटो: micmol  CC licence के अधीन
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